(N/A) सूर्य अपक्षय (weathering) की प्रक्रिया के माध्यम से मृदा निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है:
- सौर विकिरण के कारण दिन के समय चट्टानें गर्म होकर फैलती हैं।
- रात के समय ये चट्टानें ठंडी होकर सिकुड़ती हैं।
- चूंकि चट्टान के विभिन्न हिस्से अलग-अलग दर से फैलते और सिकुड़ते हैं, इसलिए इस असमान तापन और शीतलन के कारण चट्टानों में दरारें पड़ जाती हैं, जिससे वे छोटे टुकड़ों में टूट जाती हैं और अंततः मृदा का निर्माण होता है।
$(b)$ धूल को निम्नलिखित कारणों से प्रदूषक माना जाता है:
- धूल के कणों को सांस के साथ अंदर लेने से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और फेफड़ों के कैंसर जैसी श्वसन संबंधी बीमारियां हो सकती हैं।
- धूल जब धुएं और जलवाष्प के साथ मिलती है, तो यह 'स्मॉग' (smog) बनाती है, जिससे दृश्यता कम हो जाती है और दुर्घटनाएं होती हैं।
- सीमेंट, एस्बेस्टस या कोयले की धूल के संपर्क में आने से गंभीर एलर्जी, छींक आना और तपेदिक $(TB)$ जैसी पुरानी बीमारियां हो सकती हैं।